मंगलवार, 1 जनवरी 2019

काश!!

स्रोत: pixabay
'काश',
ये शब्द नहीं लाश है,
उन इच्छाओं की,
उस प्रेम की,
उस टूटे रिश्ते की,
जो डर, झिझक और अहम के चलते,
न हो सके पूरे,
न बन सके दोबारा,
ऐसी लाशें,
जिन्हें ढोना होता है ताउम्र,
किसी बेताल की तरह अपने काँधे पर,
तब तक जब तक हम विचरते हैं इस दुनिया में,
किसी प्रेत की तरह
- अंजान

© विकास नैनवाल 'अंजान'

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