रविवार, 31 मई 2020

बड़ी ताकत अपने साथ बड़ी जिम्मेदारियाँ भी लेकर आती हैं

Image by Gerd Altmann from Pixabay

'बड़ी ताकत अपने साथ बड़ी जिम्मेदारियाँ भी लेकर आती हैं' एक ऐसी सूक्ति है जिसे हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह सूक्ति मैंने सबसे पहले एक फिल्म में सुनी थी। यह फिल्म स्पाइडरमैन श्रृंखला की थी और इसमें टोबी मेग्वाईर ने स्पाइडर मैन की भूमिका निभाई थी। ऐसा नहीं था कि मैंने इससे पहले स्पाइडरमैन नहीं देखा था। मुझे याद है कि स्टार प्लस में छः बजे के करीब फॉक्स किड्स नाम का एक शो आता था जिसमें कई कार्टून्स दिखाए जाते थे। एक्स मैन, घोस्ट राइडर, स्पाइडर मैन, डन्जन्स एंड ड्रैगन्स उन शोज में से हैं जो इसका हिस्सा होते थे। लेकिन इस शो में मैंने कभी वो एपिसोड नहीं देखा था जब पीटर पार्कर के अंकल बेन उसे यह नसीहत देते हैं। इसलिए जब भी इस सूक्ति के विषय में सोचता हूँ तो मेरे जहन में उस फिल्म का ही ख्याल आता है।

आज इस कथन का ख्याल मुझे इसलिए आया कि इस सूक्ति को अब हम सभी लोगों को आत्मसात करने की जरूरत है। यह वह सूक्ति है जो स्पाइडरमैन बने पीटर पार्कर को सही राह दिखलाती है और अब यह हमारी जरूरत भी बन चुकी है।

आज के वक्त में तकनीक ने सोशल मीडिया के रूप में हर व्यक्ति को बहुत बड़ी ताकत नवाज दी है। व्यक्ति अब अपनी बात कम से कम वक्त में बड़े से बड़े जन समूह तक पहुँचा सकता  हैं। सोशल मीडिया वह ताकत है जिसके माध्यम से पल में लोग अर्श में पहुँचाये जाए सकते हैं और पल में ही फर्श में भी लाये जा सकते हैं। जनधारणाएं बनाई जा सकती हैं और जनांदोलन चलाए जा सकते हैं।

रविवार, 17 मई 2020

कौसानी ट्रिप 7: ग्वालदम से कौसानी

यह यात्रा 5 दिसम्बर 2019 की शाम से 8 दिसम्बर 2019 तक की गयी 

कौसानी ट्रिप
सात दिसम्बर 2019
इस यात्रा वृत्तांत को शुरुआत से पढने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें:
कौसानी यात्रा 1

पिछली कड़ी में आपने पढ़ा कि हम लोग बैजनाथ मंदिर देखने के पश्चात ग्वालदम जाने वाली गाड़ी में बैठ गये  थे। डेढ़ बजे से थोड़ा पहले हम ग्वालदम के लिए निकले थे और ढाई बजे के लगभग ग्वालदम में पहुँच चुके थे।

अब आगे:


चाय नहीं पियूँगा!!
ग्वालदम के विषय में मैंने सबसे पहले राकेश भाई से तब सुना था जब कौसानी पहुँचकर इन्होने होटल एजेंट से इसके विषय में पूछा था।  उस वक्त तो मैंने राकेश भाई से कुछ पूछा नहीं था लेकिन बाद में जब पूछा तो राकेश भाई ने बताया कि ग्वालदम से हिमालय की चोटी बहुत नजदीक लगती है। यह सुनकर मेरा भी ग्वालदम जाने का मन करने लगा था। और आज हम ग्वालदम में थे।

यहाँ तक जो सड़क हमे लायी थी उसमें इतने मोड़ थे और गाड़ी इतनी बलखाई थी कि मेरे पेट की हालत थोड़ा ठीक नहीं थी। मुझे अजीब सा होने लगा था। वही राकेश भाई नींद लेने के बाद चुस्त दुरस्त लग रहे थे। हम टैक्सी से उतरे और हमने आस पास नजर फिराई। यह एक छोटा कस्बा नुमा जगह थी। किधर जाना था हमे पता नहीं था लेकिन सबसे पहले राकेश भाई को चाय पीनी थी। हम लोग मार्किट से निकलती हुई एक सड़क पर बढ़ गये।

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