मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

बुढ़िया के बाल | हिन्दी कविता | बाल कविता

बुढ़िया के बाल | हिन्दी कविता | विकास नैनवाल 'अंजान'
Image by Amol Sharma from Pixabay 

नोट:  मुझे बुढ़िया के बाल हमेशा से ही पसंद रहे हैं। बचपन में भी यह पसंद आते थे और आज भी बहुत पसंद आते हैं। मुझे याद है जब बचपन में घंटी बजाते हुए भैया बुढ़िया के बाल बेचने आते थे तो मैं काफी उत्साहित हो जाता था। इसी उत्साह को मैंने इस रचना के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की है। 

रविवार, 24 जनवरी 2021

फोटो निबन्ध: घुमक्कड़ी की यारी, मेरी यह सवारी

राकेश शर्मा

राकेश शर्मा घुमक्कड़ हैं और इस घुमक्कड़ी में उनकी साथिन उनकी मोटर बाइक रहती हैं।  न जाने कितने किलोमीटर का उनका यह साथ रहा है। मुझे भी यदा कदा उनकी इस गाड़ी पर सवारी करने का मौका मिलता रहता है। 

बुधवार, 20 जनवरी 2021

चुपके से एक बूँद बरसी - सुजाता देवराड़ी

सुजाता देवराड़ी
सुजाता देवराड़ी
सुजता देवराड़ी लेखिका और गायिका हैं। उन्होंने हिन्दी और गढ़वाली गीत लिखे हैं। वहीं हिन्दी, गढ़वाली और जौनसारी भाषाओं में गाया है। उनका अपना ब्लॉग भी है जिसमें वह लिखती रहती हैं। उनका एक यू ट्यूब चैनल भी है जहाँ वह गीत प्रोड्यूस भी करती हैं।

बुधवार, 6 जनवरी 2021

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