मंगलवार, 5 नवंबर 2019

वैम्पायर की प्यास


वैम्पायर की प्यास
Image by Pete Linforth from Pixabay



कभी धुंधलके रस्ते से
कभी अँधेरे कोनो से
कभी किसी झुरमुटे से
वह देखता रहता है
और करता है इंतजार
किसी ज़िंदा इनसान का
घात लगाकर

रविवार, 3 नवंबर 2019

साहित्य आजतक 2019 - 1

2 नवम्बर 2019,शनिवार

क्या: साहित्य आजतक दूसरा दिन
कहाँ: आईजीएनसीए(इंदिरा गाँधी नेशनल सेण्टर ऑफ़ आर्ट्स)
कैसे पहुँचे: केन्द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से गेट नम्बर से निकल कर किसी से भी पूछ लिए। ऑटो चालीस रूपये में पहुँचा देगा



नवम्बर का महीना है और जब भी मैं इस समय दिल्ली में होता हूँ तो एक ऐसा साहित्यिक मेला है जिसमें शिरकत करने की हमेशा कोशिश करता हूँ। यह एक ऐसी जगह है जहाँ साहित्य में रूचि में रखने वाले मेरे दोस्त भी मिल जाते हैं और हम लोगों को साहित्य रचने वाली विभूतियों के विचारों से अवगत होने का मौका मिलता है। जिन लोगों को हम पढ़ते आये हैं उन्हें सजीव अपने समक्ष देखना और उनके विचारों को जानना सच में ही एक अतुलनीय अनुभव होता है।

इस साल भी नवम्बर आया और साहित्य आजतक भी आया। 2 नवम्बर को भारतीय अपराध साहित्य के मेरे पसंदीदा लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का सेशन इधर होना निर्धारित था तो इसी के चलते मैंने साहित्य आजतक में शिरकत करने का फैसला किया।

मैं सुबह सुबह उठा तो देखा आसामान पर कोहरे की एक परत लगी हुई थी और सूरज महाशय को इस कोहरे को भेदने में दिक्कत महसूस हो रही थी। एक तरह से यह मौसम दिल्ली एन सी आर के प्रदूशण स्तर की चुगली कर रहा था।

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