सोमवार, 6 अप्रैल 2020

कौसानी ट्रिप 5 - बैजनाथ की ओर

यह यात्रा 5 दिसम्बर 2019 की शाम से 8 दिसम्बर 2019 तक की गयी 


कौसानी ट्रिप

सात दिसम्बर 2019
इस यात्रा वृत्तांत को शुरुआत से पढने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें:
कौसानी यात्रा 1

पिछली कड़ी में आपने पढ़ा कि हमें कौसानी में दो दिन रहने का ठिकाना मिल गया था। होटल पहुँचकर हमने आस पास के इलाके में घूमे और फिर सो गये। अब आगे :

सुबह की चाय 
रात को मैं जो सोया तो सुबह आठ सवा आठ बजे ही उठा। मेरी आँखें खुली तो देखा राकेश भाई गले में कैमरा टाँगे मुस्करा रहे थे। हमने जो भी यात्राएं साथ की हैं उनमे हमेशा ही ऐसा होता रहा है कि वह पहले ही जग जाते हैं और मैं देर में जगता हूँ। इस बार भी कुछ अलग नहीं हुआ।

मैं बिस्तर से निकला तब वह बालकोनी की तरफ जाकर उधर से फोटो निकाल रहे थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने सुबह छत पर फोटो खींचते हुए बिताई थी। सुबह सूर्य की पहली किरण जब सामने मौजूद हिमालय पर पड़ी थी तो वह स्वर्णिम आभा से चमकने लगा था। उस दृश्य को बयान करते हुए राकेश भाई बहुत ही प्रफुल्लित लग रहे थे। वह इस दृश्य को अपने कैमरे में उतार पाने के बाद बेहद खुश थे। उनकी यह यात्रा तो सफल हो रही थी। लेकिन जहाँ तक मेरा ख्याल था मुझे अभी सबसे ज्यादा जिस चीज की जरूरत थी वह एक कप चाय थी।

"चाय पियोगे?",मैंने उनसे पूछा।
"नहीं मैं ऊपर ही पी आया", राकेश भाई ने कहा।"जब आप घोड़े बेचकर सो रहे थे..", उन्होंने आगे जोड़ा।
"मुझे फोटो वोटो खींचना पसंद नहीं है", मैंने सफाई सी दी और बात का विषय बदलते हुए कहा- "चलो तैयार होना शुरू कर दीजिये। जब तक चाय आती है, रेडी हो जाओ। मैं चाय पीकर तैयार होऊंगा और फिर हम घूमने निकल चलेंगे।"

रविवार, 5 अप्रैल 2020

चश्मों का समय समय पर साफ किया जाना जरूरी है

चश्मे ही चश्मे
Image by Kranich17 from Pixabay

कुछ दिनों पहले एक खबर देखी की लेंस कार्ट 2020 में 500 नये स्टोर खोल रहा है। लेंसकार्ट एक कम्पनी है जो चश्मे बेचती है।  इस खबर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चश्मो की बिक्री देश में बढ़ रही है।

इसी खबर को पढ़कर मुझे याद आया कि कुछ दिनों पहले जब मैं मेट्रो स्टेशन पर ट्रैन का इन्तजार कर रहा था तो मुझे लगा कि मुझे अब चश्मा लगाने की जरूरत है। हुआ यूँ कि ट्रैन के आने का इंतजार करते हुए जब मैंने दाएं बाएं गर्दन घुमाई तो दूर मौजूद इंडिकेटर मुझे धुँधला सा दिखाई थी। लगा इसे साफ़ देखना है तो चश्मा लगा लेना ही पड़ेगा।

कभी कभी सोचता हूँ कि यह चश्मा भी क्या खूब चीज बनाई है।अगर सही है तो चीजें साफ़ दिखाई देती हैं और सही नहीं है तो धुँधली तो दिखाई ही देती हैं बल्कि गलत चश्मा सिर दर्द भी कर देता है। वहीं इन चश्मों को लगातार साफ किया जाना भी जरूरी होता है। हो सकता है आपका चश्मा साफ हो लेकिन उसमें जमी धूल के चलते भी आपको साफ दिखाई नहीं देता हो।

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