रविवार, 8 नवंबर 2020

सिग्नल मैन - चार्ल्स डिकिन्स

चार्ल्स डिकेन्स की कहानी द सिग्नल मैन का हिंदी अनुवाद (Hindi translation of Charles Dicken's The Signal Man)




चार्ल्स डिकिन्स ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध और महानतम लेखकों में से एक रहे हैं। उनकी लिखी हुई रचनाएँ आज भी उतनी ही शिद्दत से पढ़ी जाती हैं जितना की तब जब वह इन्हें लिख रहे थे।

द सिग्नल मैन चार्ल्स डिकिन्स द्वारा लिखी गयी हॉरर और रहस्यकथा है जो कि सबसे पहली बार 1866 में  'आल द इयर राउंड' नामक सप्ताहिक पत्रिका के क्रिसमस संस्करण में प्रकाशित 'मगबी जंक्शन' नामक संकलन में प्रकाशित हुई थी।

मैंने यह कहानी प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग में मौजूद कहानी संग्रह थ्री घोस्ट स्टोरीज, जिसमें चार्ल्स डिकिन्स की तीन हॉरर कहानियों को संकलित किया गया है, में पहली बार पढ़ी थी। यह संग्रह मुझे उस वक्त रोचक लगा था। उस वक्त मेरा इनका अनुवाद करने का कोई इरादा नहीं था लेकिन अब चूँकि मैं अपनी वेबसाइट के लिए पब्लिक डोमेन में मौजूद अपनी पसंदीदा कहानियों का अनुवाद कर रहा हूँ तो सोचा इस संग्रह से भी एक कहानी का करना चाहिए और इस कारण द सिग्नल मैन का अनुवाद करने की मैंने कोशिश की है। 

उम्मीद है यह कोशिश आपको पसंद आएगी। 

शनिवार, 24 अक्तूबर 2020

फोटो निबन्ध: एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे




तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे 
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे 

क़ैसर-उल जाफ़री का यह शेर राकेश शर्मा पर एकदम फिट बैठता है। अपनी घुमक्कड़ियों के दौरान राकेश कई ऐसी खूबसूरत शामें अपने कैमरे के माध्यम से चुरा कर ले आते हैं कि देखने वाले के मुँह से वाह अपने आप निकल पड़ती है।

राकेश भाई को मैं जितना जानता हूँ उसके हिसाब से कह सकता हूँ कि उन्हें घुम्म्कड़ी में जिस चीज का शौक सबसे ज्यादा है वो उगते सूरज और ढलते सूरज अपने कैमरे में कैद करना रहा है।  उगते सूरज को अपने कैमरे में कैद करने के लिए वह सुबह सुबह उठ जाते हैं और ढलते हुए सूरज के कारण जो आसमान में खूबसूरती विद्यमान हो जाती है उसे कैद करने के लिए घुमक्कड़ी को विराम देकर इन मनभावन नज़रों को कैद करने लगते हैं।  मैंने खुद उनके साथ कई यात्राएँ की है (कल्सुबाई, कौसानी, चित्तोड़गढ़-कुम्भलगढ़, गिरनार-सोमनाथ-गिर, झाँसी-ओरछा, जैसलमेर-जोधपुर, माउंट आबू इत्यादि) तो इन सब क्रियाकलापों का प्रत्यक्ष दर्शी रहा हूँ। कई बार तो जल्दी न उठने के लिए दिए जा रहे तानों को भी भोगा है क्योंकि वह सुबह उठकर फोटो खींच आते हैं और मैं तब तक बिस्तर पर लेटा ही रहता हूँ।

आज का फोटो-निबन्ध उनके घुमक्कड़ी के इसी पहलू को उजागर करता है। आज 'दुई-बात' आपके समक्ष घुमक्कड़ी के दौरान देखे गये शामों के ऐसे नज़ारे लेकर आ रहा है जिसने राकेश भाई को ठिठकने पर मजबूर कर दिया था और वो उन्हें चुराकर अपने साथ ले आये। 

राकेश भाई का पूर्ण परिचय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
राकेश शर्मा

उनके सोशल मीडिया हैंडल निम्न हैं:
फेसबुक | इंस्टाग्राम | यूट्यूब

उम्मीद है उनका यह नया फोटो निबन्ध आपको पसंद आयेगा। 

मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

आ रहे हैं फेलूदा

फेलूदा श्रृंखला के कुछ उपन्यास

कल दैनिक भास्कर में छपी एक खबर ने यकायक ही मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह खबर केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन के एक ब्यान पर आधारित थी। संडे संवाद में उन्होंने फेलूदा के आगमन की बात की थी। 

यह मेरे लिए आश्चर्य की बात थी क्योंकि मैं भी एक फेलूदा को जानता हूँ। यह फेलूदा बांग्ला फिल्मकार और कथाकार सत्यजित राय द्वारा रचा गया सबसे मकबूल किरदार है। प्रोदोष रंजन मित्तर एक सत्ताईस अट्ठाईस साल का तेज तरार युवा है जो पेशे से जासूसी करता है।  वह अपने पेशे में टॉप पर है और इसलिए कई लोग उसके पास अपने मामले सुलझाने के लिए लाते रहते हैं। वह अक्सर अपने मामले में अपने छोटे चचेरे भाई तपेश रंजन मित्तर और लेखक दोस्त लाल मोहन गाँगुली उर्फ़ जटायू  को साथ लेकर चलता है। वह तपेश को तोपसे कहता है और वहीं चूँकि प्रोदोष का घर का नाम फेलू है तो तोपसे उसे फेलूदा यानी फेलू भाई कह कर बुलाता है। यहीं से फेलूदा नाम प्रसिद्ध भी हुआ है।

शनिवार, 19 सितंबर 2020

फोटो निबन्ध: घुमक्कड़ी के कुछ अद्भुत क्षण

नीलम रावत पेशे से खाद्य वैज्ञानिक  हैं लेकिन उन्हें घूमने फिरने का शौक है। उनका यही शौक उन्हें देश के कई कोनों में ले जाता है। 

इस पोस्ट में नीलम रावत ने हमारे साथ घुमक्कड़ी के कुछ ऐसे ही क्षणों को साझा किया है। 

इन क्षणों में उन्होंने दक्षिण भारत की अपनी एक यात्रा, जिसमें वो कर्नाटक के गोकर्ण और हम्पी क्षेत्र में गयी थी, और उत्तर-पूर्वी भारत में नागालैंड और मणिपुर की सीमा पर बसी  जूको घाटी की घुमक्कड़ी के दौरान ली गयी कुछ तस्वीरों को साझा किया है।

उम्मीद है यह फोटो निबन्ध आपको पसंद आयेगा।

नीलम रावत का पूरा परिचय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
नीलम रावत

सोमवार, 14 सितंबर 2020

असफलता का मतलब- जीवन का अन्त नहीं है ! - योगेश मित्तल



Image by GuHyeok Jeong from Pixabay

सफलताएं और असफलताएं जीवन का हिस्सा हैं। जब हम कोई कार्य करते हैं तो यह बात तय होती है कि या तो हम उसमें सफल होंगे या असफल। जहाँ सफलता हमें खुशी देती है और हमें ऊर्जा से भर देती है,  वहीं असफलता हमें दुःख और अवसाद के गहरी अँधेरी खाई में भी ढकेल देती है। 

कई बार देखा गया है कि असफलता के कारण लोग इतने निराश हो जाते हैं कि वह आत्महत्या तक कर देते हैं। 

लेकिन क्या यह सही है? 

जीवन के अलग अलग पड़ावों में कई चीजें ऐसी आती हैं जो कि उस वक्त तो हमें बहुत महत्वपूर्ण लगती हैं लेकिन भविष्य में जब हम उनके विषय में सोचते हैं तो पाते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है और वही चीजें हमें महत्वहीन या कम महत्वपूर्ण लगने लगती हैं। ऐसे में जीवन कों इन चीजों के लिए न्यौछावर करना तर्कपूर्ण नहीं है। कोई भी परेशानी इतनी बड़ी नहीं है जिसका हल न हो सके। कोई भी परेशानी ऐसी नहीं है जिसके चलते जीवन का त्याग करना वाजिब कदम हो। जीवन अमूल्य है। यह सम्भावनाओं से भरा हुआ। जब हम जीवन का अंत करते हैं तो इन असंख्य सम्भावनाओं को भी नष्ट कर देते हैं।

जीवन के मूल्य और इसकी संभावनाओं  को रेखांकित करते हुए योगेश मित्तल जी ने निम्न लेख लिखा है। आप भी इस लेख को पढ़िए। - विकास नैनवाल 'अंजान'

शनिवार, 12 सितंबर 2020

गूगल के ब्लॉगर से बने ब्लॉग पर एम्बेड किये गये विडियो अगर मोबाइल पर नहीं दिख रहे हैं तो क्या करें?

मोबाइल में एम्बेडेड विडियो को कैसे दिखायें


न्टरनेट पर कार्य करते हुए कई बार आप ऐसी परेशानियों से रूबरू हो जाते हैं जिनसे पहले आपका पाला नहीं पड़ा था। जब यह परेशानियाँ आपके समक्ष आती हैं तो आप पहले तो अपना सिर खुजाते हैं, थोड़ी देर तक स्क्रीन को तकते हैं और फिर उसका हल ढूँढने में लग जाते हैं। 

जब हल मिल जाए तो आप आगे बढ़ जाते हैं। यह ब्लॉग बनाने से पहले मैं भी यही करता था लेकिन फिर जब ब्लॉग बना तो अब उस परेशानी का निवारण करने के बाद उसका हल यहीं डाल देता हूँ। 

पिछले हफ्ते भी मैं एक ऐसी ही परेशानी से दो चार हुआ। हुआ यूँ कि मैंने कुछ दिनों पहले एक यूट्यूब विडियो तैयार किया और उसे अपने ब्लॉग पर पोस्ट किया। मैं अक्सर लैपटॉप से ही विडियो पोस्ट करता हूँ तो इस बार भी ऐसे ही किया। मैंने ब्लॉग चेक किया तो सब सही था लेकिन फिर किसी ने मुझे बताया कि उन्हें विडियो नहीं दिख रहा है। 

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