मंगलवार, 13 नवंबर 2018

प्रेम कबूतर


एक दिन कबूतरों के एक जोड़े पर नज़र चली गई और फिर अपने जीवन में मौजूद प्रेम कबूतरों का ख्याल मन में आ गया। उसी से ये निकला है। यह क्या है? इसका तो मुझे अंदाजा नहीं है, पर शायद इसमें सच्चाई है। कम से कम अपने अनुभवों से जो मैंने जाना है वह तो समाहित ही है।

स्रोत: पिक्साबे 
गुटुर गुटुर
पुच पुच 
आह आह
वाह वाह

गुटुर गुटर 
गुटुर गुटुर

गुटर गुटर 
किच किच
कांय कांय
झांय झांय
व्हाई व्हाई 
डाई डाई,
हाय हाय,

गुटुर गुटुर
गुटुर गुटर

गुटुर गुटुर
पुच पुच 
आह आह
वाह वाह

-अंजान

© विकास नैनवाल 'अंजान'

4 टिप्‍पणियां:

  1. ये प्रेम की गुटुर गू है ... प्रेमी ही समझ सकता है ...
    बहुत खूब ....

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    1. सही कह रहे हैं। पल में तोला,पल में माशा हो जाते हैं। उनकी इसी प्रवृत्ति को दर्शाने की कोशिश है।

      हटाएं
  2. आकर्षण,सामीप्य,नोकझोंक, प्यार और झड़प यही तो होता है लव लाइफ में।
    लव बर्ड की जिंदगी का वास्तविक वर्णन किया है आपने।
    बहुत बढ़िया।

    जवाब देंहटाएं

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