रविवार, 8 मार्च 2020

आर्सन प्लस: भाग 1 - डाशील हैमेट

स्रोत: पिक्साबे

नोट: डाशील हैमेट एक अमेरिकी अपराध कथा लेखक थे। डाशील का नाम अमेरिका के सबसे बेहतरीन अपराध और रहस्यकथा लेखकों में शुमार किया जाता है। द माल्टीज़ फाल्कन, द थिन मैन, रेड हार्वेस्ट, द डैन कर्स उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।  उनके लिखे गए अपराध साहित्य को हार्ड बॉयल्ड डिटेक्टिव फिक्शन की श्रेणी में रखा जाता है

आर्सन प्लस सबसे पहले ब्लैक मास्क नामक पत्रिका में 1923 में छपी थी। यह कॉन्टिनेंटल डिटेक्टिव एजेंसी के जासूस को को दर्शाती पहली कहानी थी। इसी जासूस को लेकर डाशील हैमेट ने लगभग 28 कहानियाँ और दो उपन्यास लिखे थे।


उस वक्त डाशील हैमेट ने आर्सन प्लस  पीटर कॉलिनसन के छद्द्म नाम से लिखी थी। यह नाम उन्होंने क्यों चुना था इसके पीछे एक रोचक तथ्य है। 

कहा जाता है कि थिएटर और सर्कस में जब भी कोई नया व्यक्ति जुड़ता था तो उसके साथ एक तरह का मज़ाक होता था। उसे कुछ काम देकर पीटर कॉलिन्स के पास भेज दिया था। अब इधर रोचक बात यह होती थी कि उस थिएटर में पीटर कॉलिन्स नाम का व्यक्ति होता ही नहीं था। जिसे भेजा जाता वो बेचारा इस नाम के व्यक्ति को ढूँढता ही रह जाता। कालांतर में पीटर कॉलिंस का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाने लगा जिसका अस्तित्व ही न हो या जिसकी कोई औकात ही न हो यानी जो नोबडी हो। अक्सर अंडरवर्ल्ड में किसी नौसिखिये के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया जाने लगा। ऐसे में जब डाशील ने अपनी पहली कहानी लिखी तो उन्होंने इसे पीटर कॉलिनसन के नाम से छपवाया। पीटर कॉलिनसन यानि पीटर कॉलिन्स का बेटा।

मैंने इधर इस कहानी का हिन्दी में अनुवाद किया है। उम्मीद है आपको यह अनुवाद पसंद आएगा। अगर आपको यह अनुवाद पसंद आता है तो आप पोस्ट का लिंक अपने दोस्तों से साझा कर सकते हैं। मूल कहानी आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
आर्सन प्लस

कहानी चूँकि काफी लम्बी है तो इसे मैंने तीन भागों में प्रकाशित किया है।



जिम टार ने वह सिगार उठाया जो मैंने उसकी तरफ लुढ़काया था। उसने सिगार पर मौजूद पट्टी को गौर से देखा और फिर सिगार के आखिरी हिस्से को दाँतों से तोड़कर माचिस लेने के लिए आगे को झुका। "हम्म.. इतना महंगा सिगार। ये तो एक डॉलर के तीन आते होंगे।" उसने मुझे देखा और एक कुटिल मुस्कराहट के साथ मुझसे बोला - "लगता है इस बार तुम मुझसे दो चार कानून ज्यादा तुड़वाना चाहते हो।"

मैं स्कारमेंटो सिटी के इस भारी भरकम शैरिफ के साथ उस समय से काम कर रहा था जब से मैं कॉन्टिनेंटल डिटेक्टिव एजेंसी के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में आया था। इस बात को चार पाँच सालों से ऊपर का वक्फा हो चुका था और इतने वर्षों में यह जान चुका था कि यह व्यक्ति ताना मारने का कोई भी मौका कभी नहीं गँवाता था। मुझे इस बात का भी अहसास था कि वह  यह सब बातें गंभीरता से नहीं कहता था।


"आपकी दोनों ही बातें गलत हैं। पहली बात तो यह सिगार एक डॉलर में चार आते हैं। दूसरी बात यह कि मैं यहाँ आपसे अपना काम निकलवाने नहीं बल्कि आपका काम करने आया हूँ। जिस कंपनी ने थोर्नबर्ग के घर का बीमा किया था उन्हें लगता है कि इस मामले में दाल में कुछ काला है। इसी  सिलसिले में मुझे इधर भेजा गया है।"

"वह लोग कुछ हद तक सही हैं। फायर डिपार्मेंट की माने तो घर के निचले हिस्से को पेट्रोल से भिगोया गया था। उन्हें इस  चीज पता कैसे चला इसके विषय  में या तो वो जानते हैं या भगवान ही जानता है क्योंकि उधर राख के सिवाय और कुछ नहीं बचा था। मैंने मैककलम्प को इस मामले की तहकीकात में लगाया तो जरूर है लेकिन उसे अभी कुछ ठोस नहीं मिला है।"

"चक्कर क्या है? जहाँ तक मुझे जानकरी है उधर आग लगी थी।"

टार ने अपनी कुर्सी  की पुश्त की तरफ टेक लगाई और फिर चीखा- "ओये मैक..."

ऐसा लगता था मानों शेर्रिफ की टेबल पर पड़ी घंटी केवल नाम के लिए उधर थी। कुछ ही पलों में मैकहेल, मैककलम्प और मैकलिन नामक तीन डिप्टी शेर्रिफ दरवाजे पर प्रकट दिखाई दिए। चौथा मैक यानी मैकनैब शायद उस वक्त दफ्तर में नहीं था।

"क्या बात है भई?" शेर्रिफ ने मैककलम्प से पूछा - "तुम आजकल अंगरक्षकों के साथ चलने लगे हो क्या?"
यह पता चलते ही कि इस बार किस मैक का नंबर था बाकि के दोनों डिप्टी वापस उधर चले गए जहाँ वो क्रिबिज(ताश का एक प्रकार का खेल) खेलने में मशगूल थे।

"हमारे यहाँ यह शहरी बाबू उस आग लगाने वाले को पकड़ने आये हैं।" टार ने अपने मातहत को सम्बोधित करते हुए आगे कहा- "लेकिन उससे पहले हमे उन्हें यह बताना पड़ेगा कि आखिर यह मामला क्या है?"

मैककलम्प मुझे जानता था क्योंकि उसके साथ मैंने कुछ महीनो पहले ही एक डकैती की जाँच पड़ताल की थी । वह पच्चीस छबीस वर्ष का, सुनहरे बालों वाला एक हृष्ट-पुष्ट नौजवान था जो जवानी की अकड़ और आलस्य से लबालब भरा हुआ था।

"परवर्तीगार का यह हमारे ऊपर अहसान कि इनको हमारी मदद के लिए भेजा गया है," वह मेरे तरफ देखते हुए बोला।

अब तक वह एक कुर्सी में बैठ चुका था जो कि अक्सर कमरे में आने के पश्चात उसका सबसे पहला उद्देश्य होता था। आराम से खुद को टिकाने के बाद वह बोला - "तो अब तक का मामला कुछ यूँ है। थोर्नबर्ग नाम के इस व्यक्ति का घर कस्बे से कुछ मील दूर बना हुआ था। इस घर तक जाने के लिए एक पुरानी सी कच्ची सड़क थी और घर भी कुछ नया नहीं था। परसों करीब आधी रात के वक्त जेफ़ प्रिंगल, जो कि थोर्नबर्ग का सबसे नज़दीकी पड़ोसी था और उसके घर से आधा मील दूर रहता था, ने आकाश को छूती आग की लपटे देखीं तो अग्निशमन दल को फोन किया। लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ वहाँ तक पहुँची आग बुझाने लायक कुछ बचा ही नहीं था। ज्यादातर घर जलकर स्वाहा हो चुका था। प्रिंगल पड़ोसियों में वह पहला व्यक्ति था जो कि उस जलते घर तक पहुँचा था और उसके पहुँचने तक छत ढह चुकी थी।"

अपनी बात कह कर वह रुका और फिर दोबारा बोलने लगा - "किसी ने कुछ भी संदेहजनक नहीं देखा - न ही आस पास कोई अजनबी दिखाई दिए। थोर्नबर्ग के नौकर बामुश्किल खुद को ही बचा पाए। उन्हें इस बारे ज्यादा कुछ पता नहीं था। मुझे लगता है वे लोग शायद इस दुर्घटना से डर भी गए थे। लेकिन उन्होंने थॉर्नबुर्ग को अपनी खिड़की में खड़े हुए देखा जरूर था। उनके देखते ही देखते थोर्नबर्ग इस आग में जलकर भस्म हो गया था। एक व्यक्ति हेंडरसन, जो कि इसी कस्बे में रुका हुआ है, ने भी थॉर्नबर्ग को जलते हुए देखा था। आग लगने के वक्त वह वेटन से अपने घर लौट रहा था और वह उस घर तक छत ढह जाने के कुछ देर पहले ही पहुँचा था।"

"दमकल विभाग वाले कहते हैं उन्हें आग लगाने के लिए पेट्रोल के इस्तेमाल किये जाने के संकेत मिले हैं। पर कून्स दम्पति, जो कि थोर्नबर्ग के नौकर थे, का कहना है घर में पेट्रोल मौजूद नहीं था।" कहकर वह रुका और फिर मेरी तरफ देखकर बोला -"हमारे पास केवल इतनी ही जानकारी है। "

"थोर्नबर्ग के कोई रिश्तेदार वगैरह भी हैं, क्या?"

"हाँ। एक भतीजी है जो सैन फ्रांसिस्को में रहती है। उसका नाम मिसेज इवेलिन ट्रोब्रिज है। वो कल घर देखने आए थी लेकिन वहाँ उसके देखने लायक कुछ नहीं बचा था। कुछ बचाने लायक भी नहीं बचा था। फिर वह इस मामले में हमारी कुछ मदद नहीं कर सकती थी तो उसका इधर रुकने का कोई फायदा नहीं था। इसलिए वो वापस अपने घर चली गयी है।"

"नौकर किधर गए?"

"वो इधर कस्बे में ही है। वो लोग आई स्ट्रीट में मौजूद एक होटल में रह रहे हैं। मैंने उन्हें कुछ दिन तक इधर ही रुकने के लिए बोला है।"

"घर थोर्नबर्ग का था?"

"हाँ। कुछ दिन पहले न्यूनिंग एंड  वीड नाम की एक रियल एस्टेट कम्पनी से खरीदा था।"

"तुम्हारे पास इसके सिवा कोई और काम है?"

"नहीं, मैं इस वक्त बस बस यही एक मामला देख रहा हूँ।"

"ठीक है। चलो बाहर चलते हैं और थोड़ा गहराई से इस मामले की तफ्तीश करते हैं।"

                                                                      ****
कून्स दम्पति हमे आई स्ट्रीट में मौजूद उनके होटल के कमरे में मिल गए थे। मिस्टर कून्स कम ऊँचाई और थोड़े भारी बदन के व्यक्ति थे। उनका चेहरा मोहरा सामान्य था और वह उसी तरह से शिष्ट थे जिस तरह घर में इस पोजीशन में काम करने वाले मर्द अक्सर होते हैं।

उनकी पत्नी लम्बी लेकिन बेहद पतली थी। वह उम्र में अपंने पति से पाँच साल बड़ी, चालीस के लगभग, लग रही थीं। उनके चेहरे मोहरे को देखकर यह अंदाजा होता था कि वह इधर की उधर लगाने में माहिर हों। परन्तु इस समय केवल उनका पति ही सवालों के जवाब दे रहा था और वो केवल गर्दन हिलाकर उसकी बात का अनुमोदन कर रहीं थीं।

"मुझे लगता है हम शायद जून माह की पंद्रह तारीक को मिस्टर थोर्नबर्ग के यहाँ काम करने लगे थे।", मेरे पहले सवाल के जवाब में मर्द ने कहा था। "हम जून माह की पहली तारीक को सैक्रामेंटो पहुँचे थे। हमने काम की तलाश की अपनी अर्जियाँ एलिस एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो में डाल दी थी। एक दो हफ्ते बाद ही उन लोगों ने हमे मिस्टर थोर्नबर्ग के पास भेजा था और उन्होंने हमे उधर काम पर रखना स्वीकार कर दिया था।"- मर्द ने कहना जारी रखा।

"यहाँ काम करने से पहले आप लोग किधर काम करते थे?"

"साहब, हम लोग सिएटल की एक मिसेज कमरफोर्ड नाम की महिला के लिए काम कर रहे थे। लेकिन फिर उधर का माहौल मेरी पत्नी को ठीक महसूस नहीं हुआ। उसे साँस की तकलीफ है और उधर उसकी तबियत खराब रहने लगी थी। इसीलिए हमने फैसला किया कि हम लोग कैलिफ़ोर्निया आयेंगे। वैसे सच बात बोलूँ तो अगर मिसेज कमरफोर्ड अपना घर नहीं  बेचती तो हम शायद अभी सिएटल में ही रह रहे होते और इधर न आते। उनके घर बेचने ने भी हमे वहाँ से अपना बोरिया बिस्तर बांधकर यहाँ आने पर मजबूर किया था।"

"आपको थोर्नबर्ग के विषय में क्या क्या पता है?"

"हमें बहुत ही कम जानकारी है, साहब। थोर्नबर्ग साहब ज्यादा बातचीत नहीं करते थे। जहाँ तक मुझे लगता है वो कोई काम धाम भी नहीं करते थे। मेरे ख्याल से वह एक सेवानिवृत नाविक रहे होंगे। उन्होंने कभी ऐसा कुछ कहा तो नहीं लेकिन उनके तौर तरीकों से यह लगता था। वह कभी बाहर नहीं जाते थे और न ही उनसे मिलने कोई अक्सर आता था। हाँ, एक बार उनकी भतीजी जरूर इधर आई थी। यहाँ तक कि न उन्होंने आजतक किसी को चिट्ठी नहीं लिखी थी और न ही उनके नाम का कोई खत आते मैंने देखा था। उनके सोने के कमरे के बगल में एक कमरा था जिसे उन्होंने अपनी वर्कशॉप के रूप में तब्दील कर दिया था। वह अपने दिन का सबसे ज्यादा वक्त उसी वर्कशॉप में बिताते थे। मुझे तो यही लगता था कि वह कोई नया आविष्कार करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी उस वर्कशॉप का दरवाजा  हमेशा बंद ही रहता था और हमे भी उसमें दाखिल होने की इजाजत नहीं थी।"

"क्या आपको कुछ भी अंदाजा नहीं है कि उधर क्या चल रहा था?"

"नहीं, साहब। उधर न किसी चीज के ठोकने पीटने की आवाज़ आती  थी और न ही उधर से कोई गंध सी ही आती थी। उनके कपड़े भी हमे गंदे नहीं दिखते थे। यहाँ तक कि जब उन्हें धोने दिया जाता तब भी वो कपड़े इतने गंदे नहीं होते कि उन्हें देखकर लगे कि कमरे में किसी मशीन जुड़ा कुछ काम वो कर रहे थे।"

"क्या वो बहुत बुजुर्ग व्यक्ति थे?"

"वो पचास साल से एक भी दिन ज्यादा नहीं रहे होंगे,साहब। वह सीधा तन कर चलते थे और उनके सिर और दाढ़ी के बाल भी घने थे। उनका कोई भी बाल अभी तक सफेद नहीं हुआ था।"

"क्या उनके साथ आप लोगों को कोई परेशानी का सामना करना पड़ा था?"

"अरे बिलकुल नहीं साहब। वह अजीब जरूर थे लेकिन बेहद सज्जन थे। उन्हें ज्यादा झिकझिक करना पसंद नहीं था। बस उनका खाना सही बना हो, उनके कपड़े सही ढंग से व्यवस्थित हों और उन्हें कोई बाहर का आदमी बिना वजह परेशान न करे,  यही कुछ बातें थी जिनका वो हमसे सख्ती से पालन करने की उम्मीद करते थे। इसके सिवा तो उनका घर में होना न होना एक बराबर था। वह हमें केवल भोर में या फिर रात को ही दिखाई देते थे।"

"चलिए अब आग के विषय में बात करते हैं। आप मुझे छोटी से छोटी चीज भी बताइये। कुछ भी छोड़ियेगा नहीं।"

"ठीक है साहब।  वह दिन भी एक आम दिन था। हम अक्सर रात के दस बजे सोने चले जाते हैं और उस दिन भी रात के दस बजे हम लोग सोने चले गए थे। हमारा कमरा घर की दूसरी मंजिल में, पीछे की तरफ था। अब मुझे वक्त का इतना सही सही अंदाजा तो नहीं है लेकिन सोने के कुछ देर बाद मैं एकदम से खाँसते हुए उठा था। हमारा कमरा धुएँ से भरा हुआ था और मेरी बीवी का तो दम ही घुट रहा था। मैं एकदम से उछलकर खड़ा हुआ और अपनी बीवी को घसीटते हुए नीचे लेकर गया जहाँ पीछे के तरफ बने एक दरवाजे से हम लोग बाहर निकल गये।"

"जब मैंने यह सुनिश्चित कर लिया कि मेरी बीवी अहाते में सुरक्षित है तो मुझे थोर्नबर्ग साहब का ख्याल आया और मैंने घर में दोबारा दाखिल होने की कोशिश करी। लेकिन तब तक पूरी की पूरी पहली मंजिल आग की लपटों से घिर चुकी थी। पीछे के रास्ते से जाना मुमकिन नहीं था इसलिए मैंने भाग कर आगे की तरफ आया। मैं यह देखना चाहता था कि कहीं मालिक आगे की तरफ से तो बाहर नहीं निकल गये थे। लेकिन मुझे वह दिखाई नहीं दिये। आग की रोशनी से पूरा अहाता दिन की तरह उजला हो रखा था। तभी मुझे एक हृदयविदारक चीख सुनाई दी। अभी भी मैं उस चीख को महसूस कर सकता हूँ और उसका ख्याल आते ही मेरे रौंगटे खड़े हो जाते हैं। मैंने आवाज की दिशा में देखा तो चीख दूसरे मंजिल के सामने वाले कमरे की तरफ से उभरी थी।  उस कमरे की खिड़की पर  मैंने उन्हें देखा। वो खिड़की से बाहर आने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन चारों तरफ लकड़ी का काम था जो कि आग पकड़ चुका था।  इसी कोशिश में वो एक बार और चिल्लाए और फिर पीछे की तरफ गिर गये। उनके गिरते ही मैंने छत को उनके ऊपर ढहते हुए देखा था।"

"मैंने आस पास काफी खोजा था लेकिन मुझे उधर ऐसी कोई सीढ़ी या ऐसा कोई सामान भी नहीं मिला था जिसके माध्यम से मैं ऊपर चढ़कर उनकी कुछ मदद कर सकूँ। मैं बेबस सा खड़ा बस ऊपर देख सकता था।"

"इसी दौरान एक और महाशय, जिधर मैं खड़ा था, उधर पहुँच गये थे। इन साहब ने अपनी गाड़ी दूर सड़क पर खड़ी कर रखी थी। लेकिन हम दोनों ही साहब को बचाने के लिए कुछ भी कर सकने में असमर्थ थे। घर चारों तरफ से जल रहा था और उसके हिस्से इधर उधर से ढह रहे थे। चूँकि हम कुछ नहीं कर सकते थे तो हम वापस उधर गये जहाँ मैंने अपनी पत्नी को आग से दूर छोड़ा था। उस वक्त वो बेहोश हो गयी थी और उसे होश में लाने का वक्त भी मुझे नहीं मिला था। मैं आगे की तरफ आ गया था। अब मैं उधर गया तो मैं अपनी पत्नी को होश में लाया। आगे तो आपको पता ही है।"

"उस दिन शाम को या रात को सोने से पहले आप लोगो ने कुछ संदिग्ध गतिविधि महसूस की थी। जैसे कोई अनजान आवाजें आपनी सुनी थी या कोई व्यक्ति आपको उधर टहलता हुआ दिखा था?"

"नहीं साहब।"

"अच्छा घर में कोई पेट्रोल या कोई ज्वलनशील पदार्थ रखा करते थे आप लोग?"

"नहीं सर। थोर्नबर्ग साहब की कोई गाड़ी तो थी नहीं।"

"सफाई के लिए?"

"साहब घर में मेरे ख्याल  से तो कोई पेट्रोल नहीं था। हाँ, अगर थोर्नबर्ग साहब की वर्कशॉप में कुछ रहा होगा तो उसका मुझे ज्ञान नहीं है। कपड़ों की सफाई हम घर में करते भी नहीं थे। जब उनके कपड़े धुलवाने होते थे तो मैं उन्हें कस्बे में ले जाता था और घर की बाकि लांड्री बनिया का वह लड़का ले जाया करता था जो कि घर का खाने पीने का सामान लेकर इधर आता था।"

"क्या आप लोगों को कुछ भी ऐसा पता है जो कि आग लगने के कारणों पर रोशनी डाल सके?"

"नहीं साहब।  मैं तो खुद उस वक्त आश्चर्यचकित था जब मुझे पता चला कि किसी ने घर को आग लगाने की कोशिश की है। मुझे इस पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा कि कोई आखिर ऐसा क्यों करेगा..?"
                                                                                                                                               
                                                                  ****

"तुम्हारा इनके विषय में क्या ख्याल है?", होटल से निकलते हुए मैंने मैककलम्प से पूछा।

"ये लोग घर के हिसाब किताब में थोड़ा बहुत हेरा फेरी कर सकते हैं या घर की कटलरी वगैरह चुरा सकते हैं लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये लोग कातिल हो सकते हैं।"

पहली दफा कूनस दम्पति से मिलने के बाद मुझे भी ऐसा ही लग रहा था। लेकिन मरने वाले के सिवा वही लोग थे जो कि घटना स्थल पर तब भी मौजूद थे जबकि आग लगने की शुरुआत हुई थी। यह बात ध्यान देने लायक थी। हम लोग एलिस एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो पहुँचे और उधर के मेनेजर से हमने कुछ बातें की।

मैनेजर ने हमे बताया कि कून्स दम्पति उसके दफतर में जून महीने की दूसरी तारीक को आये थे। उन्होंने 45 वुडमानसी टेरेस,सिएटल, वाशिंगटन में  रहने वाले एक मिसेज एडवर्ड कमरफोर्ड नाम की महिला का हवाला उन्हें दिया था। फिर उसने खुद मिसेज कमरफोर्ड से इस दम्पति के विषय में जानने की कोशिश की थी। उसके खत का जवाब देते हुए मिसेज कमरफोर्ड ने कहा था कि यह दम्पति उनके यहाँ काफी  सालों से काम कर रहा था और इस दौरान उनके काम को लेकर उसे कोई शिकायत नहीं थी। जून माह की तेरह तारीक को थोर्नबर्ग ने उनकी संस्था को एक आदमी और उसकी पत्नी को घर का  काम सम्भालने के लिए  भेजने को कहा था। उन्होंने दो जोड़ों को भेजा भी था लेकिन थोर्नबर्ग को वो लोग पसंद नहीं आये थे। उसने आखिरकार कून्स को थोर्नबर्ग के यहाँ भेजा जिन्हें कि उसने आखिरकार  काम पर रखा। वैसे  मैनेजर की व्यक्तिगत राय यह थी कि उसके भेजे हुए पहले के जोड़े कून्स से हर मामले में ज्यादाबेहतर थे।

मैनेजर से मिली जानकारी से एक बात तो साफ थी कि कून्स दम्पति ने किसी योजना के तहत थोर्नबर्ग के यहाँ नौकरी हासिल नहीं की थी। ऐसे करने के लिए उन्हें काफी भाग्यशाली होना पड़ता और एक जासूस के लिए सौभाग्य या संयोग में विश्वास करना ठीक नहीं होता है। इन बातों पर वह तभी विश्वास कर सकता है जब उसके पास ऐसे संयोग या सौभाग्य का कोई पुख्ता अकाट्य सबूत हो।

                                                                          क्रमशः

अगली कड़ी: आर्सन प्लस भाग 2

आर्सन प्लस के सभी भाग:
आर्सन प्लस भाग 1
आर्सन प्लस भाग 2
आर्सन प्लस भाग 3


मैं ब्लॉग पर अक्सर अंग्रेजी कहानियों के हिन्दी अनुवाद डालता रहता हूँ। आप मेरे द्वारा अनूदित इन रचनाओं को निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
हिन्दी अनुवाद

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© विकास नैनवाल 'अंजान'

10 टिप्‍पणियां:

  1. कथा लेखक के परिचय के साथ अनुवाद बहुत बेहतरीन बन पड़ा है । कहीं भी कथानक के प्रवाह और रोचकता में कोई बाधा नही । आपकी श्रम साधना से हिन्दीभाषी पाठकों को अंग्रेजी साहित्य से रूबरू होने का अवसर मिलता है ।

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  2. बढ़िया अनुवाद। आपके प्रयास को साधुवाद। उम्मीद है आगे भी ऐसे ही आपके द्वारा किए गए अनुवाद पढ़ने को मिलते रहेंगे।

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    1. जी आभार हितेष भाई। उम्मीद है बाकी के भाग भी आपको पसंद आएँगे।

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  3. चूंकि मैंने ओरिजिनल कहानी नहीं पढी तो अनुवाद पर कमैंट करने में असमर्थ हूं हालांकि कहानी रोचक लगी है

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    1. जी, ब्लॉग पर राय रखने के लिए हार्दिक धन्यवाद। कहानी आपको रोचक लगी यह जानकर अच्छा लगा। इसी पोस्ट में मूल कहानी का लिंक भी दिया गया है।

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  4. किसी की कहानी को रोचकता के साथ अनुवाद करके कहना हमेशा कठिन कार्य होता है किंतु आप इसमें बहुत हद तक सफल रहे हैं।

    शैली काफी कुछ जेम्स हेडली से मिलती है।

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    1. जी डाशील और जेम्स हैडली चेस एक ही तरह का लिखते थे। ऐसा माना भी जाता है कि जिस हार्ड बॉयल्ड फिक्शन की शुरुआत डाशील और रेमंड शैंडलर ने करी उसे चेज ने ही आगे बढ़ाया।

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