सोमवार, 15 दिसंबर 2014

ख्याल और मुस्कराहट

जब भी आते हैं मुझे ख्याल तेरे
न जाने क्यूँ मुस्कुराते हैं लब मेरे ,

सोचता हूँ ये क्या हो रहा हैं मुझे ,
क्या नाम है इस मर्ज का मेरे ,

रह रह कर मुस्कराता हूँ मैं ,
मुझको देख कर मुस्कुराते हैं साथी मेरे ,

जब भी आते हैं मुझे ख्याल तेरे
न जाने क्यूँ मुस्कुराते हैं लब मेरे ,

पूछते हैं क्या हो गया है तुझे,
परेशां होते हैं वो हालात पे मेरे ,

मैं कहता हूँ उनसे दुनिया अब और हसीं हो गयी है ,
सपने और खूबसूरत हो गये हैं मेरे ,

ये सुनकर उन्हें हैरत होती है ,
नहीं आते हैं उन्हें समझ जज़्बात मेरे ,

नादान हैं वो , शायद इश्क नहीं किया उन्होंने कभी ,
या शायद कुछ अलग से ही हैं हालात  मेरे ,

जब भी आते हैं मुझे ख्याल तेरे
न जाने क्यूँ मुस्कुराते हैं लब मेरे ,
- विकास 'अंजान'
नोट : copyright  © २०१४ विकास नैनवाल  

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